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Best Zakir Khan Shayari in Hindi [2023]

Zakir Khan Shayari: Zakir Khan is a globally renowned Indian comedian and actor. He first came into the limelight when he won Comedy Central India’s Best Stand-Up Comedian competition in 2012. Later he started appearing in many comedy news shows including On Air with AIB. Since then he has released three standup specials including Tathastu (2022), Haq Se Single (2017) and Kaksha Gyarvi (2018) on the OTT platform Amazon Prime Video.

He was born in Indore, Madhya Pradesh on 20th August 1987 to a Muslim Rajasthani family of classical musicians. Many don’t know that he is the grandson of Sarangi Maestro Ustad Moinuddin Khan. Although he spent his life in Delhi, he credits his father with his success. 

Initially, he was doing a diploma in Sitar and decided to drop out. During an interview, he stated that if he had not been a standup comedian then he would be a music teacher. Because of his great punch line and jokes, he has become a face of the Indian stand-up comedy circuit since 2012. Apart from that, he ghostwrites and produces radio shows. He also co-hosted On Air with AIB, a news comedy show alongside Gursimran Khamba and Sorabh Pant in 2015. It was televised in Star World, India. He appeared on the judge’s panel in ‘Comicstaan Season 2’ on Amazon Prime. He mentored the contestant in their comedy genre also known as anecdotal comedy. Later he appeared in Season 3 as a judge. He also appears on the podcast series Ummeed on Gaana where he tells his small life incidents along with his other comedian friends.

If you’re a fan of Shayaris and haven’t yet explored the work of Zakir Khan, it’s time to dive in! With his unique style and delivery, Zakir Khan’s Shayaris are not only heartfelt but also witty and relatable. His words beautifully capture the many nuances of life, love, and relationships, and are sure to strike a chord with anyone who has experienced the ups and downs of these experiences. Whether you’re in the mood for something romantic, melancholic, or thought-provoking, Zakir Khan’s Shayaris offer a wide range of emotions and perspectives. So, if you want to explore the world of Shayaris and discover the magic of Zakir Khan’s words, start reading his work today!

Best Zakir Khan Shayari in Hindi

Mein chah kar bhi, tum jaisa nahi ban paya.

Dekho na…Tum toh aage badh gaye, par mein kahaan badh paaya.

अपने आप के भी पीछे खड़ा हु मैं
ज़िंदगी कितना धीरे चला आ रहा है
मुझे जगाने जो और भी हसीं होके आते थे
उन खवाबो को सच समझकर सोया मैंने।

मेरी अपनी और उसकी आरज़ू में फर्क ये था
मुझे बस वो…
और उसे सारा जमाना चाहिए था।

Zakir Khan Shayari

मैं वक़्त और तुम क़यामत. देखना,

जब हम मिलेंगे तो इस कायनात में सब कुछ रुक जायेगा

तुम भी कमाल करते हों ,
उम्मीदें इंसान से लगा कर
शिकवे भगवान से करते हो।

Zakir Khan Shayari

वो कौन है भाई

इस बात का सबसे बड़ा हिस्सा

इस बात का होता है कि

वो कहाँ से आया है

गर यकीन ना हों तो बिछड़ कर देख लो
तुम मिलोगे सबसे मगर हमारी ही तलाश में।

वो रात भी मेहनत करके गला घोट घोट के जीना
खाने का वक्त है ही नहीं और काम बहुत ज्यादा
इज्जत कम और पैसे उससे भी कम
माँ बाप का साथ नहीं किसी के कहे पर भरोसा हो जाय
ऐसी कोई बात नहीं।

Best Zakir Khan Shayari

तुम भी कमाल करते हो,

उम्मीदें इंसान से लगा कर

शिकवे भगवान से करते हो

अब कोई हक़ से हाथ पकड़कर महफ़िल में दोबारा नहीं बैठाता, सितारों के बीच से सूरज बनने के कुछ अपने ही नुकसान हुआ करते है..

मैं जानना चाहता हु की
क्या रतिफ के साथ चलते हुए शाम को यु ही
बेखयाली में उसके साथ भी हाथ
टकरा जाता है क्या तुम्हारा।

Top Zakir Khan Shayari

जितना तेज़ाब मिला दुनिया से, उसी की शराब बेचता हूँ,

ज़िल्लतें छतों पर टांग, अस्मा को खाब बेचता हूँ.

मेरे दो चार खुवाब है जिन्हे मैं
आसमा से दूर चाहता हु
ज़िंदगी चाहे गुमनाम रहे
लेकिन मौत मैं मशहूर चाहता हु।

यूँ तोह भूले हैं हम लोग कई,
पहले भी बहुत से,
पर तुम जितना कोई उनमें से,
कभी याद नहीं आया…

Zakir Khan Quotes

बहुत मासूम लड़की है इश्क़ की बात नहीं समझती न जाने

किस दिन में खोयी रहती, मेरी रात नहीं समझती

क्या आप अपनी छोटी उंगली से उसका हाथ पकड़ते हैं?
ऐसे ही वो मुझे पकड़ती थी। । ! !

Zakir Khan Shayari

हर एक दस्तूर से बेवफाई, मैं शिद्दत से है निभाई.

रास्ते भी खुद है ढूँढे, और मंज़िल भी खुद बनायीं

ये जो कभी वो जुल्फ बिखेड़े तो
बिखड़े मत समझना।
यदि माथे पे आ जाय तो बेफिक्री
मत समझना दरअसल उसे ऐसी पसंद है
उसके आज़ादी उसकी खुली जुल्फों में बंद है

खुदा के वास्ते उसे कभी टोकना मत
उसकी आज़ादी से उसे कभी रोक न देना
क्यकि अब मैं नहीं तुम उसके दिलदार हो तो सुन लो
उसे अच्छा नहीं लगता।

खुदा के वास्ते उसे कभी टोकना मत
उसकी आज़ादी से उसे कभी रोक न देना
क्यकि अब मैं नहीं तुम उसके दिलदार हो तो सुन लो
उसे अच्छा नहीं लगता।

अब वो आग नहीं रही ना शोलो सा देहेक्ता हूं,
रंग भी सबके जैसे है और सब के जैसा है महकता है.

We hope you’ve loved reading our collected range of the best Zakir Khan Shayari…

Priyadarshi Shastri

Priyadarshi Shastri, a seasoned writer with 5 years of experience, holds a degree in PR from Amity University. An authoritative voice in Entertainment, Lifestyle, and Trending News, his trustworthy insights captivate audiences worldwide.

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